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गुणायतन एक परिचय

जैन दर्शन के अनुसार आत्मा ही परमात्मा है । प्रत्येक आत्मा अनन्त शक्तियों का पिण्ड है । किसी आत्मा में आत्म शक्तियां पूर्ण प्रकट होती है तो किसी में कम | जैसे काली अंधियारी सघन घटाएँ सूर्य के प्रकाश को मंद कर देती है । जैसे काली अंधियारी सघन घटाएँ सूर्य के प्रकाश को मंद कर देती है ।

गुणायतन क्यों

तीर्थराज सम्मेद शिखर जैनियों का शिरोमणि तीर्थ है । यहाँ प्रतिवर्ष लाखों श्रद्धालु/पर्यटक आते हैं । इतने बड़े तीर्थस्थल पर दिगम्बर जैन समाज का मंदिरों के अतिरिक्त ऐसा कुछ भी नहीं है जो यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं/पर्यटकों को आकर्षित कर उन्हें जैन धर्म का बोध करा सके ।

गुणायतन क्या ?

जैन दर्शन के इन्हीं चौदह गणस्थानों को सुन्दर/आकर्षक ढंग से प्रस्तुत करने के लिए हम एक विशिष्ट योजना को मूर्त रूप देने जा रहे हैं । यह योजना एक अभिनव योजना है । गुणायतन के नाम से बनने जा रहा यह धर्मायतन जैन धर्म के परम्परागत मंदिरों/धर्मायतनों से एकदम अलग एक अद्भुत ज्ञानमंदिर होगा ।

गुणायतन मंदिर

पत्थरों से बना दिगंबर परंपरा में श्री सम्मेद शिखरजी में पंचायतन शैली का प्रथम कलात्मक विशाल मंदिर आधुनिक विज्ञान के माध्यम से १४ गुणस्थानों का दिग्दर्शन गुणायतन में आत्मा से परमात्मा बनने की जीवंत झांकियों के साथ संसारी जीवों की विभिन्न भूमिकाओं के अनुरूप उनके चिंतन और चर्या का भी सहज बोध होगा |

Mission Statement

While it’s primary goal is to serve residents of the capital district, visitors from all over the world take part in its activities

Quisque nulla

Quisque nulla

Quisque nulla

“Fear not what is not real, never was and never will be.
What is real, always was and cannot be destroyed.”

गुणात्मक परिवर्तन

समाज की गुणात्मक परिवर्तन का उपक्रम

परम पूज्य गुरुदेव के प्रवचन, शंका समाधान
आदि के प्रसारण का प्रवचन प्रावधान
शंका समाधान में विशेष विषयों पर गुरुदेव के समाधानो की क्लिप्स को यूट्यूब पर उपलब्ध कराना
छोटे बच्चों को संस्कारित करने हेतु जैन धर्म पर आधारित आकर्षित एनिमेटेड कहानियों को यूट्यूब पर अपलोड करना |

प.पू मुनि प्रमाणसागर जी - जीवन परिचय

जैन सिद्धांतों में छुपे वैज्ञानिक तथ्यों को अपनी सरल वाणी से जन जन तक
पहुंचाने वाले मुनि श्री 108 प्रमाण सागर जी महाराज स्वयं को जैन धर्म का
एक विद्यार्थी मानते हैं तथा अपने ज्ञान को गुरु चरणों में समर्पित करते हुए
उनका आशीर्वाद मानते हैं। ऐसे पूजनीय, ज्ञान के भंडार, शंकाओं का
समाधान करने वाले मुनि श्री का जीवन परिचय इस प्रकार है।
जन्म- 27 जून 1967
जन्मस्थान- हजारीबाग (झारखण्ड)
पूर्व नाम- नवीन कुमार जैन
लौकिक शिक्षा- मैट्रिक
माता-पिता- श्रीमती सोहनी देवी- श्रीमान् सुरेन्द्र कुमार जैन सेठी
मुनि दीक्षा तिथि- 31मार्च 1988 (महावीर जन्मकल्याणक)
दीक्षा गुरु- सन्त शिरोमणि दिगम्बराचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज
मुनि दीक्षा स्थल- दिग. जैन सिद्धक्षेत्र सोनागिरि जी, दतिया (म.प्र.)

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